गौरवशाली बलिदानों को नमन, वीरता की गाथा का सम्मान : गोल्डन एरो डिवीजन ने मनाया 63वां स्थापना दिवस ।

गौरवशाली बलिदानों को नमन, वीरता की गाथा का सम्मान : गोल्डन एरो डिवीजन ने मनाया 63वां स्थापना दिवस ।

जालंधर (सिटी तेज़ खबर ब्यूरो)  जब भारतीय सेना 1965 के युद्ध में पाकिस्तान पर अपनी ऐतिहासिक विजय की हीरक जयंती वर्ष गर्व के साथ मना रही है, उसी गौरवमयी अवसर पर गोल्डन एरो डिविजन—जिसने उस निर्णायक युद्ध में अद्वितीय भूमिका निभाई—ने फिरोजपुर कैंट स्थित बरकी वॉर मेमोरियल पर अपना 63वां स्थापना दिवस गहरी श्रद्धा और सैन्य गौरव के साथ मनाया।

समारोह की शुरुआत शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने वाली पुष्पांजलि परेड से हुई, जिसका नेतृत्व मेजर जनरल आर.एस. मनराल, एसएम, वीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, गोल्डन एरो डिविजन ने वरिष्ठ अधिकारियों व सैनिकों के साथ किया। “द लास्ट पोस्ट” की गूंजती धुनों के बीच भारत माता के अमर सपूतों को नमन किया गया, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा में प्राण न्यौछावर कर दिए।

बरकी मेमोरियल आज भी गवाही देता है सितंबर 1965 की वह ऐतिहासिक जंग, जब गोल्डन एरो डिविजन के रणबांकुरों ने अपूर्व शौर्य और सैन्य चातुर्य का परिचय देते हुए इछोगिल नहर पार कर दुश्मन की मजबूत चौकियों को ध्वस्त किया और लाहौर से मात्र 6 किमी दूर स्थित रणनीतिक कस्बा बरकी को फतह किया। यह युद्ध अभियान भारतीय सेना के इतिहास में साहस, नेतृत्व और बलिदान की अमिट मिसाल बनकर दर्ज है।

इच्छोगिल नहर पार करते हुए, भारतीय सैनिकों ने लाहौर से महज 6 किमी दूर स्थित रणनीतिक नगर ‘बरकी’ पर विजय प्राप्त की। यह अभियान भारतीय सैन्य इतिहास में साहस का स्वर्णिम अध्याय बन चुका है।

इसके पश्चात एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें गोल्डन एरो डिवीजन के सम्मानित पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया, और उनकी अमूल्य सेवाओं को सराहा गया।भारतीय सेना की मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, फिरोज़पुर के विकलांग सैनिक सिपाही गुरविंदर सिंह को एक संशोधित स्कूटर प्रदान किया गया — यह उनकी अटल निष्ठा और वीरता को समर्पित एक भावनात्मक पहल थी।

अपने संबोधन में जनरल ऑफिसर कमांडिंग ने वीर पूर्व सैनिकों के साहस, संघर्ष और बलिदान को नमन किया और कहा कि उनकी विरासत ही आगामी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रकाश है।

63वें स्थापना दिवस का यह आयोजन गोल्डन एरो डिवीजन की गौरवशाली परंपराओं, संचालन क्षमता और पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को दोहराता है।समारोह का समापन भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं को निभाने और राष्ट्र की सेवा में अदम्य साहस व समर्पण के साथ आगे बढ़ते रहने की प्रतिज्ञा के साथ हुआ।

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