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रक्षाबंधन के धागों में बंधा बंधन ईश्वरीय बंधन: नवजीत भारद्वाज।

जालंधर (सिटी तेज़ खबर ब्यूरो) मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नजदीक लम्मा पिंड चौक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित्त श्रृंखलाबद्ध सप्ताहिक दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणों द्वारा मुख्य यजमान जानू थापर से वैदिक रीति अनुसार पंचोपचार पूजन षोढषोपचार पूजन नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई। हवन-यज्ञ में पूर्ण आहुति उपरांत सिद्ध मां बगलामुखी धाम के संस्थापक एवं संचालक नवजीत भारद्वाज ने दिव्य हवन यज्ञ पर उपस्थित प्रभु भक्तों को पावन त्योहार रक्षाबंधन के बारे में ब्याखान करते है कि सभी त्योहारों में रक्षा बंधन एक अनूठा उत्सव है, जो न तो किसी जयंती से संबंधित है और न ही किसी विजय राज तिलक से। रक्षाबंधन ऐसा प्रिय बंधन है जिसमें हर भाई अपनी बहन के प्यार में बंधना चाहता है। यह बंधन ईश्वरीय बंधन है इसलिए प्रत्येक प्राणी खुशी से बंधने के लिए तैयार रहता है।
वास्तव में बंधन शब्द प्रतिज्ञा का प्रतीक है और रक्षा मनोविकारों से बचाव का प्रतीक है। तिलक आत्मिक स्मृति का प्रतीक हैं। राखी का धागा प्रतिज्ञा में दृढ़ता का प्रतीक हैं, परस्पर अटूट स्नेह का प्रतीक है। गीता में कहा गया है- कि जब संसार में नैतिक मूल्यों की कमी आने लगती है तब ज्योर्तिलिंगम भगवान शिव, प्रजापति ब्रह्मा द्वारा धरती पर पवित्र धागे भेजते हैं, जिन्हें बहने मंगलकामना करते हुए भाइयों को बांधती है और भगवान शिव उन्हें नकारात्मक विचारों से दूर रखते हुए दुख और पीड़ा से मुक्ति दिलाते हैं।
नवजीत भारद्वाज जी ने एक धार्मिक प्रेरक प्रसंग द्वारा प्रभु भक्तों को बताया कि शिव की निरंतर आराधना तथा धर्म की मर्यादा के लिए माता पार्वती ने भगवान शिव को कहा- कि देवताओं को कोई ऐसा सूत्र दीजिए जिससे इनकी रक्षा हो सके। देवी के वचन सुनने के बाद भगवान शंकर ने रक्षासूत्र दिया। जिसको माता पार्वती ने सभी देवताओं की कलाई पर बांधा। इसी को रक्षा सूत्र कहा गया है। सूत्र का अर्थ धागे से भी है और सिद्धांत से भी। द्रौपदी ने भी अपनी साड़ी का धागा निकालकर कृष्ण की कलाई पर बांधा था और कृष्ण ने अपने वचनानुसार कौरव सभा में द्रौपदी की रक्षा कर लाज बचाई थी।
इस अवसर पर पूनम प्रभाकर,सरोज बाला, अंजू,   गुरवीर, प्रिया , रजनी, सोनीया,नरेश,कोमल , कमलजीत, धर्मपाल, अमरजीत सिंह, राकेश प्रभाकर,    समीर कपूर,  अमरेंद्र कुमार शर्मा, नवदीप, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र,रोहित भाटिया, अमरेंद्र सिंह,बावा खन्ना, नवीन, प्रदीप, सुधीर, सुमीत, बावा हलचल ,जोगिंदर ,  मनीष , डॉ गुप्ता,सुक्खा, अमनदीप , अवतार सैनी, परमजीत सिंह,राज कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ , नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, सोनू , गुलशन,संजीव, भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की,  रोहित ,  मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, सुनील जग्गी,निर्मल,अनिल,सागर,दीपक, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, बलदेव सिंह भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे। हवन-यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।

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