ऐसे हों हमारे करम- नवजीत भारद्वाज।

ऐसे हों हमारे करम- नवजीत भारद्वाज।

  • कर्म में लीन मनुष्य ही अपनी मंजिल तक पहुंच पाता है
  • मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी में मां बगलामुखी जी के निमित्त श्रृंखलाबद्ध सप्ताहिक दिव्य हवन यज्ञ सम्पन्न

जालंधर, (सिटी तेज़ खबर ब्यूरो)  मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नजदीक लम्मा पिंड चौक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त श्रृंखलाबद्ध सप्ताहिक दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन किया गया।सर्व प्रथम ब्राह्मणों द्वारा मुख्य यजमान बाबा गौरी गिरी (कामाख्या देवी आसाम) से विधिवत वैदिक रीति अनुसार पंचोपचार पूजन, षोढषोपचार पूजन , नवग्रह पूजन उपरांत हवन यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।मां बगलामुखी धाम के मुख्य सेवादार नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन यज्ञ पर उपस्थित मां भक्तों को मनुष्य को जीवन में कर्म की परिभाषा का ब्याख्यान करते हुए कहते है कि प्रार्थनाओं में जीवन का सारांश निहित होता है। संसार में एक ही संबंध शाश्वत एवं सनातन है – इंसान का अपने अंतस से, जिसे हम ईश्वर भी कहते हैं। अन्य सारे संबंध कृत्रिम हैं, मानवनिर्मित और क्षणभंगुर हैं। मनुष्य का परमात्मा से संबंध ही आदि सत्य है। मां-बाप, भाई-बहन, पति-पत्नी इत्यादि सांसारिक जिम्मेदारियां हैं। मनुष्य को अपनी सांसारिक जिम्मेदारियां तो पूरी करनी हैं, ईश्वर से अपने संबंध को महसूस कर उसे प्रगाढ़ बनाना है। ऐ मालिक तेरे बंदे हम कहकर हम अपने उसी अंतस से जीवन सारांश कह रहे होते हैं।
नवजीत भारद्वाज जी कहते है कि जीवन कर्म प्रधान होना चाहिए। कर्म ही मनुष्य की पूजा है। आलस्य और पलायनवाद का जीवन में कोई स्थान नहीं है। जिस प्रकार वेग से बहती हुई नदी की जलधारा सागर तक पहुंच जाती है, उसी प्रकार कर्म में लीन मनुष्य ही अपनी मंजिल तक पहुंच पाता है। कर्म करने के अलावा मनुष्य के पास जीवन में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। हमारी प्रार्थनाओं में कर्म को परिभाषित किया गया है, कर्म के गुण को बताया गया है। कर्म का वर्गीकरण इससे ज्यादा सरल नहीं हो सकता।
शास्त्र एवं धार्मिक ग्रंथों का सारा निचोड़ एक ही पंक्ति में समा गया है, ऐसे हों हमारे करम। साफ और सीधी सी बात है कि कौन सा कर्म वांछनीय है और कौन सा अवांछनीय। जो कर्म मनुष्य एवं प्रकृति के हित में है, वह करने योग्य है। कर्म में ही समस्त सृष्टि के अमरत्व का सार है। जिस कर्म को करके आत्मसंतुष्टि हो, चित्त प्रफुल्लित रहें एवं आत्मा पर कोई बोझ न हो, वही वास्तविक कर्म है। जिस कर्म से किसी को हानि हो, चोट पहुंचे उससे हमें बचना है। नेक कर्म से ही शांति एवं सद्भाव संभव है।
इस अवसर पर श्री कंठ जज, श्वेता भारद्वाज, मुनीश शर्मा, निर्मल शर्मा ,पूनम प्रभाकर,सरोज बाला, रुपम प्रभाकर,सुनीता,  अंजू,   गुरवीर, प्रिती ,मंजू, प्रिया , रजनी, सोनीया,नरेश,कोमल , कमलजीत, धर्मपाल, अमरजीत सिंह, राकेश प्रभाकर,    समीर कपूर,  अमरेंद्र कुमार शर्मा, नवदीप, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र,रोहित भाटिया, अमरेंद्र सिंह,बावा खन्ना, विनोद खन्ना, नवीन जी, प्रदीप, सुधीर, सुमीत, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, बलदेव सिंह भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन-यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।

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